क्या दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)-मुखी घर वास्तु में शुभ है?
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)-मुखी घर को वास्तु में विशेष उपायों की आवश्यकता होती है — यह दिशा वर्जित मानी जाती है (दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) और दक्षिण सहित). आदर्श दिशाएँ उत्तर, पूर्व, और उत्तर-पूर्व (ईशान्य) हैं.
दिशा मार्गदर्शिका
क्यों
मुख्य द्वार शुभ दिशा में खुलना चाहिए — उत्तर, पूर्व या पवित्र ईशान्य। परंपरागत रूप से नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में द्वार वर्जित माना गया है।
सूक्ष्म स्तर पर प्रवेश द्वार का आकलन 16-बिंदु दिक्सूचक से किया जाता है: ईशान्य सर्वाधिक शुभ है, नैऋत्य वर्जित है, और अनुकूल दीवार के भीतर द्वार को ईशान्य की ओर खिसकाना बेहतर है। (प्रति-पद/32-द्वार देवता विश्लेषण एक शास्त्र-विशेष स्तर है, जिसे किसी विशेष सम्प्रदाय के चयन पर इस नियम-आधार में जोड़ा जा सकता है।)
— VastuVerdict नियम आधार v1.1 (मुख्यधारा सर्वसम्मति)
क्या पहले से ऐसा बना है?
यदि द्वार स्थानांतरित नहीं हो सकता, तो देहरी को स्वच्छ, प्रकाशयुक्त और अवरोधरहित रखें; वास्तु पिरामिड या नामपट्टिका लगाएँ, तथा द्वार पर सामान या जूते-चप्पल न रखें।
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