वास्तु के अनुसार पूजा कक्ष कहाँ होना चाहिए?

वास्तु पूजा कक्ष को आदर्श रूप से उत्तर-पूर्व (ईशान्य) में रखता है. पूर्व, उत्तर, और पश्चिम भी स्वीकार्य हैं. इसे दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य), दक्षिण-पूर्व (आग्नेय), उत्तर-पश्चिम (वायव्य), और केंद्र (ब्रह्मस्थान) में रखना अशुभ माना जाता है.

दिशा मार्गदर्शिका

आदर्शउत्तर-पूर्व (ईशान्य)
स्वीकार्यपूर्वउत्तरपश्चिम
वर्जितदक्षिणदक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)उत्तर-पश्चिम (वायव्य)केंद्र (ब्रह्मस्थान)

क्यों

ईशान्य (उत्तर-पूर्व) सर्वाधिक पवित्र दिशा है और पूजा/प्रार्थना स्थल का उचित स्थान है।

— VastuVerdict नियम आधार v1.1 (मुख्यधारा सर्वसम्मति)

क्या पहले से ऐसा बना है?

पूजा कक्ष को ईशान्य में स्थानांतरित करें; मूर्तियाँ पश्चिम की ओर मुख किए हों (भक्त पूर्व की ओर मुख करे) और स्थान स्वच्छ व अव्यवस्थारहित रखें।

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